अस्तित्व की पहचान

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सुबह माँ की पुकार हूँ,
शाम को बहन की मुस्कान हूँ,
कभी पत्नी का प्रेम हूँ,
कभी बेटी का स्नेह हूँ|

परिभाषा हूँ अहं की,
धीरज का ठहराव हूँ,
दादी माँ का अनुभव हूँ,
देवी का इतिहास हूँ|

ब्रम्हांड का विश्वास हूँ,
श्रृंगार का उत्साह हूँ,
मर्यादा का विस्तार हूँ,
परंपराओं का इम्तेहान हूँ|

पहचान हूँ आफ़रीन की,
बाँसुरी की आवाज़ हूँ|
दुनिया का अर्ध हूँ,
और फिर भी,
अपने अधूरेपन में पूर्ण हूँ |

मैं नारी हूँ,
एक ऐसा आकार हूँ,
जो चौकोर में कैद होते हुए भी,
इस गोल दुनिया की शिल्पकार हूँ |

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Bansuri ChoukseyWritten by Bansuri Chouksey ·

My soul is made up of stories. Rumi | Dan Brown | Poets Of The Fall | Agatha Christie | Imtiaz Ali |

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