एक आवाज़ बुला रही है

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A voice is calling me

एक आवाज़ है जो बुला रही है
बिना डोर के खींचे जा रही है
केहती है मुझे ‘आओ पास मेरे’
तुम्हे करीब से ज़िन्दगी दिखानी है

ज़िन्दगी के कई पहलु हैं
तुमने अभी देखा ही क्या है
काम की चार दीवारों में
तुमने खुदको चुनवा दिया है

इस नदिया के उस पार
उठाओ पतवार और चले आओ
चीर दो इस पहाड़ को
और नई एक सड़क बनाओ

निकल पडो एक ऐसे सफर पे
जिसमें अगले पल की खबर ना हो
जहां बैठें वो बसेरा बने
जहां आँख खुले सवेरा हो

उठो चलो आज, अभी,
कहीं देर ना हो जाए
कलियों को खिलते देखना है तुम्हे
तारों को टिमटिमाते देखना है तुम्हे

ज़िन्दगी के रंगों में रंगना है तुम्हे
हर उतार चढ़ाव को शब्दों में पिरोना है तुम्हे
हसी का अमृत और गम का ज़हर पीना है तुम्हे
फिर हर कहानी में ख़ुशी के आंसू रोना है तुम्हे

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Kamlesh AcharyaWritten by Kamlesh Acharya ·

Kamlesh Acharya is an MBA by qualification, an advertiser by profession, a poet by ramification, a playwright by passion, a thinker through introspection and a seeker through meditation. His debut poetry book titled ‘Kindle the Spirit’ was awarded ‘The Best English Poetry Book’ at Mumbai’s ‘Lit-o-Fest’ 2015. He believes that his real calling is to explore new possibilities, express deeper meaning and kindle the spirit in himself and others.

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2 Comments

  1. FeniFeni

    Very well-written! 🙂

  2. Drashti

    Very deep intensed..good

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